एसजीओटी से पूरा बनता है सीरम ग्लूटामिक ऑक्सालोएसेटिक ट्रांसएमिनेस । इसे एस्पार्टेट ट्रांसएमिनेस (Aspartate Transaminase AST) भी कहा जाता है। यह एक एंजाइम है जो लिवर में पाया जाता है। लिवर को जब भी कोई चोट पहुंचती है तो यह एंजाइम रक्त में पहुंच जाता है। इसीलिये, लिवर से जुड़ी बीमारियों में यह एसजीओटी एंजाइम पाया जाता है।
SGOT कितनी होनी चाहिये?
एसजीओटी की नॉर्मल रेंज निम्न प्रकार है –
- पुरुष : 8 से 40 यूनिट प्रति लीटर (U/L)
- महिला : 6 से 32 यूनिट प्रति लीटर (U/L)
SGOT की वैल्यू (Level) कब बढ़ती है?
- एसजीओटी की वैल्यू हेपेटाइटिस अर्थात् अक्यूट हेपेटाइटिस (Acute Hepatitis) में जैसे की वायरल हेपेटाइटिस बी सी ए में बढ़ती है।
- बैक्टीरियल हेपेटाइटिस, मलेरिया हेपेटाइटिस (Malarial Hepatitis) या क्रोनिक हेपेटाइटिस में बढ़ जाती है।
- लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) या लिवर का कैंसर होने पर लिवर में रक्त की आपूर्ति न होने पर यह वैल्यू बढ़ जाती है।
- हेपेटोटॉक्सिक ड्रग्स जैसे दर्द की दवाईयां नॉन स्टेरिओडल एंटीइंफ्लेमेट्री ड्रग्स (NSAID), हेपेटोटॉक्सिक ड्रग्स जैसे एच आई वी की दवा, टी बी की दवाऐं, कीमोथेरपी की दवा आदि के प्रभाव से यह वैव्यू बढ़ती है।
- स्टेरॉयड लेने और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले ड्रग्स लेनेपर एसजीओटी की मात्रा को बढ़ जाती है।
- हृदय, गुर्दे और दिमाग से जुड़ी बीमारियों में भी इसकी मात्रा बढ़ जाती है क्योंकि, इन अंगों में भी एसजीओटी एंजाइम कुछ मात्रा में पहुंच जाते हैं।
- मांसपेशियों के चोटिल हो जाने पर इसकी वैल्यू बढ़ जाती है।
- हृद्पेशीय रोधगलन (Myocardial Infarction) होने पर इसकी वैल्यू बढ़ जाती है।
- गर्भावस्था में इसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।
- ज्यादा जल जाने पर भी इसकी मात्रा बढ़ जाती है।
SGOT टेस्ट क्यों किया जाता है?
एसजीओटी टेस्ट लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) का ही एक प्रकार है। एसजीओटी एंजाइम रक्त के माध्यम से कुछ मात्रा में, लिवर के अतिरिक्त भी हृदय, कंकाल की मांसपेशियों, दिमाग में भी पहुंच जाते हैं, इसलिये एसजीओटी टेस्ट लिवर फंक्शन टेस्ट के साथ कराने की सलाह दी जाती है। लिवर को यदि किसी प्रकार की हानि होती है या चोट पहुंचती है या कोई बीमारी होती है तो रक्त में एसजीओटी एंजाइम की वैल्यू बढ़ जाती है जो लिवर की बीमारी होने का संकेत देती है। इस टेस्ट के द्वारा लिवर की बीमारियों का पता लगाया जाता है। बीमारियां किस प्रकार की हैं और उनमें अंतर क्या है और लिवर कितना खराब हुआ है, यह सब जानने के लिये यह टेस्ट किया जाता है।
SGOT टेस्ट किन परिस्थितियों में किया जाता है?
- पीलिया के लक्षण प्रकट होने पर जैसे त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ जाना, पेशाब में अधिक पीलापन आ जाना आदि।
- पेट में लंबे समय से दर्द की शिकायत। जी मिचलना, उलटी होना।
- पेट में सूजन।
- अनीमिया अर्थात् शरीर में रक्त की कमी।
- हेपेटोटॉक्सिक की दवाई के चलते कोई लिवर की समस्या/हानि।
- मोटापा।
- डायबिटीज के केस में।
- अधिक शराब पीने के कारण लिवर की समस्या।
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